संदेश

दू टा दुपंँतिया

मन पुरुष

हम खद्धर लीखैत रहलौं

ग़ज़ल नहिं ग़ज़ल सन

एहिना किछु-किछु... ग़ज़लसन

।। डेग ।।

अयाची : दयाची

राजकमल चौधरी जीक योगदान

सात टा दु पँतिया

लोकतंत्र : लोकतंत्र

ने भाषा छलय अपन ने विचार

दू टा दुपँतिया

मैल कुचैल ज्ञान

पाँच टा दूपंँतिया

प्राकृतिक मर्यादा आ मनुष्य