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फेसबुक पर जन्मोत्सव !

श्रद्धांँजलिक नेपथ्य

कोइ की कहैए तै पर नहिं जाइ

कवि छी तेँ की ?

अप्रिय किन्तु,तथापि

एक छोड़ि दू पतिया

कोश में शब्द !