संदेश

मोट अठोर रहैत छैक खोंइचा

दू पंँतिया : .....मातृ भाषा होइअय

आशीर्वाद !

भँसिअयबाक बयस: लग्न ओ राशि।

दो पँतिया आख़िरी दिन जाते जाते वो मिला...

फोसड़ी फोड़ि भोकन्नर करब...

मातृभाषाक अभिमान !

दो एक रोज़ आप चुप नहीं रह सकते

मातृभाषा - मण्डप !

गजलसन : बड़ गौरव प्रेमक हमरा

दू पंतिया : अकत तीत कहियो नहिं बाजल जे

बात कोनो बातक होइत छैक !