संदेश

वर्तमानक उपेक्षा

ओकर हमर गपशप

.....बोझ लगने लगे

युद्ध और प्रेम

माछ !

चिड़ै तं गीत ल' क' उड़ि रहल छल !

टिक टिक घोड़ा चल कलकत्ता

से की रहि गेल !

कतेक विचित्र आ खतरा वला बात!

बेस्वाद चिबायल सुखक स्वाद !

इजोत पर क़ब्ज़ा !

.....बढ़ू आगां चलू

नोरे नहायल समय !

महानता आ बोधिवृक्ष !

बेटी-बेटा अर्थात उपन्यास महाकाव्य !

रेल हो तं रात सन