संदेश

मनुष्यक बाजब !

अनका मुंह सं हम्मर खिस्सा

विद्यापति मैथिलीक अभिमान !

गर्मी छुट्टीक दुपहरिया मे बच्चाक मन

दु:ख थिक पेपरवेट

अज्ञानीक बुद्धि

हुआ डोरा ‌आ संबंध

दरमियां...

ककरा कहितियै ?

चलय लगय तं कलम

....सबहारा भाषा न'व भूमि तकलौं...

कर्पूरक अक्षरक और्दा

दुखिया दास कबीर

....जतय सौंसे रहि जइतौं

....मधुबनीक रुखि कयलक

दुपंतिया

जीतब-हारब

सुख सबहक हो

म'न मे सृष्टिक मनोरथ !

उगना विद्यापति आ राजनीति