संदेश

दू पंतिया : ने हमर दुनियें ओहन...

दू पंतिया : सौंसे आसमर्द उठि गेलै

दूपंतिया : नदी और हृदय

चोर लय चन्द्रमा शत्रु

नीक नै नीक अक्षर लेखक

देहघर

दू पंतिया : संहारे संहार अति...

सबसँ सुन्दर किछु नहि

कहबी करौट फेरि रहलय

भीम शकुनि राजनीति...

टिप्पणी मैथिली कुंठा

दुपंतिया : दुःख सुखक कुश्ती

अभिधा व्यंजना

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