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भात दालि : ललित कला

दू पँतिया ::

सामञ्यसी आलोचनाक व्यावहारिक समस्या।

बाँचल रहओ पृथ्वी पर मनुक्खक किछु भरोसा।

सखी बहिनपा के उचितवक्ता डेस्कक चिठ्ठी

लज्जा प्रकाशित देह !

लेखक,प्रकाशक आ फेसबुक : दलान नाटिका।