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भाषा आ मैथिलीक साहित्य-समय

एक टा दू पँतिया : नीलकंठ छी हम अपना

एक टा दू पँतिया : सब महान् मिथिले मे छथि

दुक्खे एखनहुँ बहिना अछि : दू पँतिया,दू टा

आशाक आसव

एहन ऐ राजनीतिक घमासान मे

दू पँतिया : टूटि क खसि पड़ि सकैए कोनो ठाँ

एकसर हमहीं छी लगैत छी सबहक सन

प्रेम आ क्रान्ति

गेल बर्ख चलिये नहिं जाइ छैक....

विद्यापति लोक केहन छलाह ?

नोंत-पता सन्दर्भ: अयोध्या २२जनवरी,२०२५.

दुःखक चोकर...

नऽव की ?

कुकूरक स'ख

रचवा लय बड़ बात एखन बआँचल छैक