संदेश

तीत-मीठक युद्ध मे

सौंसे देश जेना नोचनी...

बखारी सं बाहर सुख !

जान गिरवी रख दी हमने

पाग-डोपटाधारी महकारी

अपन आयु-यात्राक वर छी हम

बालबोध,बाढ़ि गाम आ महादेव

घर‌से होकर आ रहा है

सज्जन लोक।

बाढ़ि जं नहिं दहबितय

बाढ़ि में भंसियाइत पुरस्कार

पुरना पटोर मे चतुर्थी

किछु ने किछु होइत रहय

प्रेम सं घृणाक पराजय

....थाकल रहय ई प्राण

....कनी सुस्ता ने लिअ'

रुचय तं मैथिली साहित्य मे आधार कार्ड

ओकर सर्वभाव फेर करत झगड़ा

मैथिली कदीमाक बतिया नहिं

सृष्टिक ऋण थिक जीवन

...कनै छथि अगहने सं

भाषाक आयु